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Eagle Attitude & Success Mentality | दोस्तों बाज सिखलाता है सफलता का सबक

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Eagle Attitude & Success Mentality
Eagle Attitude & Success Mentality

Eagle Attitude & Success Mentality | दोस्तों बाज सिखलाता है सफलता का सबक

eagle attitude & success mentality : सफलता प्राप्त करना हर व्यक्ति का एक अधिकार है। हां एक बात जरूर है की सफलता हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होता है। यह समय, काल, देश के अनुसार बदलता है।

हम लोग धरती पर आए हैं तो हमारा कर्तव्य बनता है कि कुछ ऐसा सकारात्मक पहलू को ले जो लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।

दोस्तों आज हम आपको पक्षियों का राजा बाज जिसे अंग्रेजी में eagle कहा जाता है। यह एक ऐसा पक्षी है इसके विषय में जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। बाज पक्षी का जीवन मनुष्य के जीवन से काम नहीं है और उनसे मानव को शिक्षा लेना चाहिए।

प्यारी दोस्तों आप जानते हैं कि तोता कितना मीठा बोलता है देखने में कितना सुंदर होता है किंतु वह पिंजरे में कैद रहता है दूसरी तरह बज शांत रहकर भी आसमान की ऊंचाई को छूने की शक्ति बनता है और यही कारण है कि बाज को पक्षियों का राजा कहा जाता है।

यदि प्रेरणा लेना हो तो बाज से प्रेरणा लेना चाहिए ना की तोते से

बाज अधिक ऊंचाइयों पर अकेले उड़ाना पसंद करते हैं

बाज  सामान वालों के साथ उड़ता है या फिर अकेले उड़ाना पसंद करते हैं। बाज कभी भी छोटे चिड़िया के साथ नहीं उड़ाते। बाज से मनुष्य को शिक्षा लेना चाहिए उन्हें समान सोच वाले लोगों के साथ रहना चाहिए या फिर अकेले रहना चाहिए।
नकारात्मक सोच वाले और छोटे विचार वाले लोगों से दूर रहना ही उत्तम है क्योंकि यह लोग सफलता में बाधक होते हैं।

बाज निडर होते है

बाज पक्षियों का राजा है। वह अपने शिकारी पर जब हमला करता है तो यह नहीं देखा है कि शिकारी उनसे ताकतवर है। अंतिम समय तक शिकारी से मुकाबला करता है और इस कारण वह जीत हासिल करता है।

हमें बात से यही शिक्षा लेना चाहिए कि मनुष्य को भी छोटे-मोटे बढ़ाओ से लड़कर आगे  बढ़ते रहना चाहिए।  अंतिम समय तक मुकाबला करने वाले हैं सफलता प्राप्त करते हैं।

बाज की एकाग्रता और दृष्टि

बाज की दृष्टि की बात किया जाए तो यह 5 किलोमीटर दूर से अपने शिकार को देख लेता है ‌। और सभी बडो की बावजूद भी शिकार तक पहुंच जाता है। सबसे खास बात यह है जब तक वह शिकार को पकड़ नहीं देता तब तक उसकी नजर गड़ाए रखते हैं।

प्यारे दोस्तों मनुष्य का जीवन समस्याओं से घिरा हुआ है। समस्याओं का आना निश्चित है किंतु जो व्यक्ति समस्याओं के साथ लड़ता है वही विजय होते हैं। ‌ आशा को देखकर ना घबराना चाहिए और नहीं हाथ पैर हाथ धर कर बैठे रहना चाहिए।

समस्या से पार पाने के लिए बस एक ही उपाय है समस्या डटकर कर मुकाबला करना।

बाज होता है मजबूत इच्छा शक्ति वाला

बाज की इच्छा शक्ति काफी मजबूत होती है। तूफान और बारिश के समय अन्य पक्षियों में जाकर छुप कर बैठ जाते किंतु उसे समय बज आसमान में और ऊंचाई पर उड़ने लगते हैं।

विषम परिस्थिति में भी वे हवा में तैरते रहते हैं। तूफान का आनंद उठाते हैं। मनुष्य को इनसे सीखना चाहिए। विषम परिस्थिति में रो-रो कर दुखाना सुनने से अच्छा है हंसकर उस स्थिति के साथ मुकाबला करना। आपको समझना चाहिए कि क्या आप कठिन परिस्थिति में कितना कर सकते हैं।

आज जितने भी सफल व्यक्ति हुए हैं जो अपने कठिनाइयों और परेशानियों को मौका के रूप में बदलकर कामयाबी हासिल किये है।

बाज से सीखो वर्तमान में जीना

बड़ी कैसा पक्षी है जो कभी भी मरा हुआ शिकार को नहीं खाता। वह हमेशा अपने लिए ताजा मांस खाना पसंद करता है।
मनुष्य को बज से एक शिक्षा लेना चाहिए कि हमें भूतकाल में घटित घटनाओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हमें अपनी वर्तमान के विषय में सोचना चाहिए। यदि जीवन में सफलता चाहते हैं तो वर्तमान को लेकर चलना पड़ेगा।

बाद से हमें यही शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को वर्तमान में जीने की आवश्यकता है। वर्तमान में किए गए मेहनत के बल पर सफलता को प्राप्त किया जा सकता है।

बाज में सीखने की मानसिकता

बाज ऐसे पक्षी है जो अपने बच्चों को जन्म देने के उपरांत कुछ दिनों के बाद घोसला से नरम नरम घास उसे निकाल कर बाहर फेंक देते हैं। ‌ ताकि बच्चे को कठिनाई हो और वह बाहर निकाल कर उड़ना शुरू कर दे।

मनुष्य को क्या गजब का शिक्षा दे रहे हैं यदि जीवन में सफलता प्राप्त करना है तो comfirt zone से आपको बाहर निकलना पड़ेगा। अन्यथा सफलता मिलना मुश्किल है।

बाज जिजीविषा से भरा हुआ

अब शुरू होती है बाज की वह कहानी जिसे सुनकर आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे। ‌ आज के जीवन के मध्य में एक ऐसा समय आता है जब उनके चोंच टेढ़े हो जाते। पैर की उंगलियों के नाखून टेढ़ी पड़ जाते हैं। पंखे भारी हो जाते हैं और वह उड़ान नहीं भर सकते।

उसे समय बाज पक्षी के लिए बस  दो ही रास्ता बचता है जीवन और मौत… किंतु यह पक्षी जीवन को ही चुनता है और इसके लिए संघर्ष करना शुरू कर देता है।

पहाड़ की चोटियों पर जाकर अपनी सोच को पत्थरों से टकरा टकराकर तोड़ देता है। सो लहू लहान हो जाता है बहुत दर्द होता है। ‌
अपने पंजे के नाखून को पत्थरों में घिसकर तो डालता है। काफी दर्द होता है।

चोच से पंखे को नोच नोच कर उखाड़ देता है, कितना दर्द होता होगा उसे समय जब वह पंखे को नोचता होगा। ‌ और फिर वह छिपकर नए पंख उगने का इंतजार करते हैं, चोंच का जख्म धीरे-धीरे ठीक होता है। नए पंखे उगते हैं अब वह फिर से उड़ान भरने के लिए पूर्ण रूप से तैयार हो जाता है।

पुनः अपनी जिंदगी का स्वागत करता है !  वापिस बादशाह बनकर लौटता है अपने ईलाके में …

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