Noida Supertech Twin Towers Demolition: क्या कहानी है, ट्विन टावर को गिराने के पीछे
Noida Supertech Twin Towers Demolition: नोएडा के सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक ट्विन टावर को ध्वस्त किया गया। सबों के मन में एक ही प्रश्न उठता है कि कुतुब मीनार से भी ऊंची इस विशाल मंजिल इमारत को क्यों गिराया गया। मिली जानकारी के अनुसार इस बिल्डिंग को गिराने का मुख्य कारण या बिल्डिंग गैरकानूनी तरीके से बनाई गई। इस बिल्डिंग के आसपास 7000 से भी अधिक लोग निवास कर रहे हैं। इस बिल्डिंग को ध्वस्त करने के विषय में सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी के सीनियर अधिकारियों पर सख्त टिप्पणी की थी।
सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने इस विषय में यहां तक कह दिया नोएडा अथॉरिटी एक भ्रष्ट निकाय है इसकी आंख, नाक, कान यहां तक कि चेहरे तक भ्रष्टाचार से लिप्त हैं।
ट्विन टावर के बगल की सोसायटियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि या टावर अवैध रूप से बनाया गया था। इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़े गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार नवंबर 2021 को ही इस टावर को गिराने का आदेश दे दिया गया था बीच-बीच में किसी वजह से मामला टलता गया और इस टावर को 28 अगस्त 2022 को गिराया गया।
ट्विन टावर में भ्रष्टाचार कैसे हुआ?
>> 2006 में सुपर टेट 17.29 एकड़ जमीन आवंटित की गई।
>>एमराल्ड कोर्ट ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के अंतर्गत 15 टावरों का निर्माण किया गया, प्रत्येक टावर में 11 मंजिल बनाई गई।
>>2009 में नोएडा अथॉरिटी में रिवाइज्ड प्लान जमा कराया।
>>ट्विन टावर केस कोर्ट तक पहुंचाने के लिए आर डब्ल्यू ए ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसके निर्माण में यूपी अपार्टमेंट ओनर्स एक्ट के उल्लंघन का दावा किया गया।
>>दो टावरों के बीच की दूरी 16 मीटर से कम
कंट्रोल डिमोलिशन सिस्टम से गिराया गया विशाल टावर को
>>3700 किलोग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया।
>>सबसे पहला विस्फोट बिल्डिंग के सबसे निचले स्तर किया गया। कंट्रोल डिमोलिशन सिस्टम से विस्फोट करने पर बिल्डिंग में गिरती है।

नीचे दिए गए वीडियो लिंक पर क्लिक करके आप महा विस्फोट का नजारा देख सकते हैं




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