Mata Hindi kavita by Rajhans Kumar
आज समझ में आया मुझको,
कितनी प्यारी हो तुम माता।
मेरा कितना ख्याल है रखती,
आंसू नयनोऺ में क्यों आता।।
मुझे प्राप्त करने को तुम माॅ॑,
पत्थर को भगवान बनाया।
कहीं नारियल और बताशा,
कहीं पर अपना शीश झुकाया।।
कितने कष्टों को तुम सहकर,
अपनी गर्भ में रखी मुझको।
पीड़ा कितनी होती होगी ,
मुझे जन्म देने में तुझको ।।
जब मैं आया इस दुनियाॅ॑ में ,
अ॑जान जगह में खुद को पाया ।
ऐसी घड़ी में तुम ही॑ माता ,
अपने सीने से चिपकाया।।
इस दुनियाॅ॑ में हर चीजों की ,
मुझको तुम पहचान कराई ।
जब भी मैं रुदन करता तो,
काम छोड़ कर दौड़ी आई।।
मुख से था जो गूंगा बालक,
मेरे अंदर से स्वर लायी।
उठ कर बिस्तर से चलने का,
तुम ही॑ माॅ॑ अभ्यास करायी।।
किसी से जब झगड़ा होती तो,
पक्ष ले मेरा मुझे दुलारा।
विचलित होकर दौड़ी आई,
जब भी तुझको कभी पुकारा।।
सोते समय लोरियाॅ॑ गाकर,
आॅ॑चल पर तुम मुझे सुलाया ।
बाबूजी के गुस्से से माॅ॑,
कई बार तुम मुझे बचाया ।।
मैं सबका प्यारा बन जाऊॅ॑,
ऐसा तुम संस्कार दिया माॅ॑।
मैं बनूॅ॑ एक बड़ा आदमी,
इसका आशीर्वाद दिया माॅ॑।।
मैं तुझको कभी भूल न पाऊॅ॑,
ऐसा तुम वरदान मुझे दे ।
करता हूॅ॑ ईश्वर से विनती,
दुनियाॅ॑ की हर खुशी तुझे दे।।



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