Home कविता कहानियां जादूगर का घमंड तोड़ा तेनालीराम | Jadugar Ka Ghamand

जादूगर का घमंड तोड़ा तेनालीराम | Jadugar Ka Ghamand

2025
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Jadugar Ka Ghamand Tora -Tenali Raman ( जादूगर का घमंड तोड़ा तेनालीराम) : एक दिन राजा कृष्ण देव राय के दरबार में एक जादूगर आया। जादूगर अपना जादू दिखा कर सबको अचंभित कर दिया।

राजा खुश होकर उन्हें ढेर सारे उपहार दिए। जादूगर को अपने कला पर धमंड था।

जादूगर ने कहा — कोई मुझे यहाँ टक्कर दे सकता है?
कोई आदमी मेरे जैसा अद्भुत करतब दिखा सकता है क्या?

इस खुले चुनौती से तेनालीराम समझ गये कि इस जादुगर में अभिमान कूट-कूट कर भरा है।

तेनालीराम खड़ा होकर बोले  “मैं तुम्हे चुनौती देता हूँ कि जो कला मैं अपनी आँखें बंद कर के दिखा दूंगा,  वह तुम खुली आंखो से भी नहीं कर पाओगे।”

क्या तुम मेरी चुनौती स्वीकार करते हो, या नहीं?
जादूगर बिना सोचे चुनौती को स्वीकार कर लिया।

तेनालीराम ने रसोई घर से मिर्ची का पाउडर लाए और अपनी आँखें बंद की और उनपर एक मुट्ठी मिर्ची पाउडर डाल दिया। दो तीन मिनट के बाद पाउडर को कपड़े से पोंछ कर ठंडा पानी से अपना चेहरा धो लिया।

अब यह काम जादूगर को आंखें खोलकर करने को कहा गया। तेनालीराम बोले “तुम तो बहुत बड़ा जादूगर हो, यह करतब दिखाओ ना।” जादूगर को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने हाथ जोड़कर विनती करने लगे।

राजा उसको माफ कर दिये । इस चतुराई पर राजा बहुत खुश हुए। तेनालीराम राज दरबार के मान‌ को बढ़ाए। राज्य की इज्जत रखने के लिए राजा कृष्ण देव राय धन्यवाद दिया।

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धन्यवाद

 

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