Ganesh chaturthi Chandra darshan : गणेश चतुर्थी पर क्यों नहीं करें चंद्र दर्शन
Ganesh chaturthi विनायक चतुर्थी के दिन मध्यान्ह में प्रथम पूज्य श्री गणेश जी का अवतरण हुआ था इसे कलंक चतुर्थी और शिवा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। कहां जाए तो अधिकतर मनुष्य किसी भी प्रकार के विघ्न क्या जाने पर भयभीत हो जाते हैं इसके कारण गणेश जी की पूजा करते हैं और उससे विघ्न समाप्त हो जाता है।
अनेक तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए विनायक भगवान कई तरह के उपाय बताते हैं। यदि आपको प्रतिकूल परिस्थितियों को आने से रोकना है तो गणेश जी की पीली कांति वाले स्वरूप का ध्यान करें और पूजा अर्चना करें। किसी भी परिस्थिति को अनुकूल रखने के लिए गणेश के अरुण कांतिमय स्वरूप का मन ही मन ध्यान करते रहे।

इसके साथ ही अच्छी सेहत के लिए लाल रंग वाले गणेश जी का ध्यान करें। जिन्हें भी धन प्राप्त करने की इच्छा हो वह हरे रंग के गणेश जी की पूजा करें। और जिन्हें भी मोक्ष की प्राप्ति करना है वह सफेद रंग के गणेश की पूजा करें और तीनों समय गणपति का ध्यान और जाप अवश्य करते रहें।
Ganesh chaturthi गणेश चतुर्थी के दिन मध्यान में गणपति पूजा में 21 मोदक अर्पण करने के बाद “विघ्नानि नाशमायंतु सर्वाणि सुरनायक। कार्यं में सिद्धिमायातु पूजिते त्वयि धातरि” का जाप करें। यदि संभव हो सके तो 21 जड़ी बूटियां जी गणेश जी को अर्पित अवश्य करें।
श्री गणेश जी को अर्पित किया गया नैवेद्य सबसे पहले उनके सेवकों – गणेश, गालव, गार्ग्य, मंगल और सुधाकर को देना चाहिए। चंद्रमा, गणेश और चतुर्थी माता को दिन में ही अर्ध्य अर्पित करें और संभव हो तो रात्रि में श्री विनायक कथा सुने या इसका भजन करें।
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